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Wednesday, July 22, 2009

अब ‘टीआरपी’ वाले मुद्दों पर मचाओ हंगामा !

दाल की कीमतें एक-दो महीनों में 20 रुपए किलो से ज्यादा बढ़ गई हैं। निजी स्कूल सरकारी आदेश के बावजूद फीस बढ़ाने में जुटे हैं। अंबानी भाइयों ने देश के गैस भंडार को अपनी जागीर समझ रखा है। महिलाओं से बलात्कार की घटनाएं रोज अखबारों में सुर्खियां बन रही हैं। इस तरह के पचासों गंभीर मसले हैं,जिन पर बहस होनी चाहिए ताकि किसी निष्कर्ष तक पहुंचा जा सके। इन मसलों पर राजनीतिक दलों में एक सहमति बननी चाहिए ताकि प्रभावी तरीके से कोई कानून बन सके-उपाय खोज सकें।

लेकिन,सहमति किस मसले पर बनती है? 'सच का सामना' पर। स्टार प्लस पर प्रसारित 'सच का सामना' भारतीय संस्कृति के खिलाफ है- यह कहते हुए समाजवादी पार्टी के सांसद कमाल अख्तर ने राज्यसभा में मामला उठाया तो बीजेपी के प्रकाश जावड़ेकर समेत कई पार्टियों के नेताओं का समर्थन मिल गया।

चलिए मान लिया कि ‘सच का सामना’ के सवाल भारतीय संस्कृति के खिलाफ हैं। लेकिन, इसमें शामिल होने वाले प्रतियोगियों को क्या खींच खींचकर हॉट सीट पर बैठाया जा रहा है? पैसा बोलता है भइया। लोगों को पैसा मिले तो बीच सड़क नंगे होने को तैयार हैं, तो यहां तो सिर्फ सच बोलना है।

लेकिन,सवाल ‘सच का सामना’ का नहीं है। सवाल है सांसदों के विरोध का। क्यों इन दिनों बालिका वधू से लेकर सच का सामना जैसे टेलीविजन कार्यक्रमों पर संसद में सवाल उठाए जा रहे हैं? क्या नेशनल ब्रॉडकॉस्टिंग एसोसिएशन मर गया है, जिसका काम ही इन कार्यक्रमों के खिलाफ सुनवाई करना है।

एक सवाल ये भी क्यों सांसदों को घटिया-बेहूदा और अश्लील विज्ञापन टेलीविजन पर नज़र नहीं आते। विज्ञापन तो उन्हें बड़े टॉयिंग लगते हैं :-)

कहीं,टेलीविजन कार्यक्रमों पर सवाल उठाने का एक सिरा खुद की टीआरपी बटोरना तो नहीं है। इन दिनों हर जगह ‘सच का सामना’ का जिक्र है तो सांसद महोदय ने इसी कार्यक्रम पर सवाल उठा डाला और सुर्खियां बटोर लीं। बालिका वधू के सिलसिले में भी यही कहा जा सकता है।

वैसे,एक वजह सांसदों का डर भी हो सकता है कि कहीं आने वाले दिनों में उन पर हॉट सीट पर बैठने का दबाव न बनने लगे। कहीं क्षेत्र की जनता कह दे- पहले हॉट सीट पर बैठकर आओ, फिर देंगे वोट। हो ये भी सकता था कि ‘सच का सामना’ में किसी भी पार्टी का छुटभैया नेता हॉट सीट पर बैठ जाए और सवालों के जवाब में भद्द पिटे आलाकमान की। मसलन-

क्या कभी आपसे आपकी पार्टी के मंत्री ने किसी काम के एवज में संबंधित पक्ष से मोटी रकम बटोरने को कहा है?

क्या आप मानते हैं कि आपने अपनी पिछली पार्टी को इसलिए छोड़ा कि वो भ्रष्टाचार के गर्त में जा चुकी है?

क्या आपने कभी अपने आला नेताओं के चरित्र पर शक किया है?

क्या आपने बड़े नेताओं के इशारे पर बूथ कैप्चरिंग या फर्जी वोटिंग करायी है?

यानी इन सवालों के जवाब देकर छुटभैया नेता तो दस-बीस लाख जीतकर निकल लेगा और जवाब देने पड़ेगे बड़े नेताओं को....

खैर, ‘सच का सामना’ बकवास है,इसमें कोई शक नहीं, लेकिन भारतीय संस्कृति के खिलाफ नारा उतना ही खोखला है,जितना ज्यादातर राजनेताओं का ईमान। क्योंकि,भारतीय संस्कृति के खिलाफ किस किस चीज को अब हम स्वीकृति मिलते देख रहे हैं-ये किसी से छिपा नहीं है। और महज 50 एपिसोड के एक रिएलिटी शो से ही भारतीय संस्कृति ध्वस्त हो ली तो फिर तो हो लिया काम।

Wednesday, July 15, 2009

बकवास है 'सच का सामना'

स्टार प्लस पर रिएलिटी शो सच का सामना के पहले एपिसोड में हॉट सीट पर स्मिथा मटाई बैठीं तो लगा कि पहली बार में ही वो एक करोड़ रुपए नहीं तो कम से कम दस लाख रुपए जरुर जीत लेंगी।

उन्होंने तमाम सवालों के सही जवाब दिए। मसलन-

-क्या आपको अपनी बड़ी बहन की इस्तेमाल की गई किताबें मिलने पर गुस्सा आता था। (हां)
-क्या आप एक हफ्ते तक बिना नहाए रही हैं। (हां)
-क्या आपको लगता है कि आप 12वीं क्लास में इसलिए फेल हो गईं क्योंकि आप आलसी थीं।(हां)
-क्या आपने कभी अपने ग्राहकों को बासी खाना भेजा है।( नहीं)
-क्या आपके ससुर आपके पति से अच्छे दिखते थे। (हां)
-क्या आपको अपने भाई से इसलिए जलन थी कि क्योंकि आपको लगता था कि वो मां-बाप का दुलारा है।(हां)
-क्या आप अपने दूसरे बच्चे के जन्म के वक्त अपनी मां के साथ न होने पर उन्हें माफ कर सकती हैं।(नहीं)
-क्या आप मानती हैं कि आपके माता पिता आपके बच्चों से ज्यादा आपके भाई के बच्चों को प्यार करते हैं। (हां)
-क्या आपको लगता है कि आपकी सास आपकी मां से बेहतर मां थीं।(हां)
-क्या आप इस डर में जीती हैं कि आपके पति दोबारा शराबी न बन जाएं( हां)
-क्या आपने कभी अपने पति को जान से मारने के बारे में सोचा है।( हां)
-क्या आप सिर्फ अपने बच्चों की खातिर अपनी शादी बचाए हुए हैं।( नहीं)
-क्या आपने कभी अपने पति को धोखा देने के बारे में सोचा है।( हां)

इन 13 सवालों के जवाब में स्मिता ने सिर्फ सच बोला। बीच में अपना रुख साफ भी किया। लेकिन,जिस प्रश्न के जवाब में वो शो से हार गईं, वो था-

-क्या आप अपने पति के अलावा किसी दूसरे मर्द से शारीरिक संबंध बनाना चाहेंगी, अगर आपके पति को पता न चले तो...

स्मिता ने जवाब दिया-नहीं। यही जवाब उन्होंने शो से पहले पोलिग्राफिक टेस्ट के दौरान दिया था। लेकिन, जवाब गलत निकला। स्मिता अपने जीते पांच लाख रुपए फिर हार गईं।

लेकिन, इस शो ने मेरे मन में दो सवाल जरुर उभार दिए। पहला ये कि इंसान की जिंदगी में एक लम्हे के कई सच होते हैं। ऐसे कई लम्हें होते हैं,जब वो पता नहीं क्या सोचा है। भावावेश में वो अपनी पत्नी,गर्लफ्रेंड को मारने के बारे में भी सोच सकता है,तो बॉस को गोली मारने की भी। अपने टीचर से ही मोहब्बत का अफसाना जुड़ता देखता है तो घर में चोरी की भी कल्पना करता है। लेकिन,क्या वो ऐसा करता है? दरअसल, जिंदगी के किस लम्हे में आपके दिमाग में क्या ख्याल आया हो-ये याद कर पाना भी कई बार मुश्किल है। शायद यही वजह है कि स्मिता उस सवाल के जवाब में हार गई,जिसका जवाब उन्हें 'नहीं' के रुप में पता था। अगर ऐसा नहीं होता तो शायद वो पांच लाख के पड़ाव पर ही बाहर हो लेतीं।

इसके अलावा, इस शो के फॉर्मेट से जुड़ा एक सवाल यह है कि प्रतियोगी का पोलीग्राफिक टेस्ट क्या हॉट सीट पर बैठने से ऐन पहले होता है या एक-दो दिन पहले टेस्ट हो लेता है। अगर,टेस्ट ऐन पहले होता है,तो शायद प्रतियोगी के हौसले के कद्र करनी चाहिए। लेकिन,अगर टेस्ट दो-एक दिन पहले हो चुका होता है तो फिर शो का फॉर्मेट दर्शकों को उल्लू बनाने जैसा है।

फिलहाल,स्टार प्लस पर यह कार्यक्रम टीआरपी बटोरने में सफल हो सकता है क्योंकि इस तरह का कोई कार्यक्रम भारतीय टेलीविजन पर कभी नहीं आया। लेकिन,हॉट सीट पर सोच समझकर बैठे प्रतियोगी इन सवालों के झंझावत से हिलेंगे-इसमें संदेह है। क्योंकि,जिन सवालों का सच चौंकाने वाला होगा, वो 'फुके हुए बम' होंगे, और सच विस्फोटक हो सकते हैं-वो अपने आप में पूरा सच नहीं होंगे। पहले एपिसोड के बाद मेरा यही निष्कर्ष है। बाकी देखते हैं आगे होता है क्या।