Sunday, March 7, 2010

चीयरलीडर का वित्त मंत्री को ख़त (व्यंग्य)

आदरणीय वित्त मंत्री जी,

मैं इंडियन प्रीमियर लीग में ठुमके लगाकर अपना पेट भरने वाली एक साधारण चीयरलीडर हूं। आईपीएल सिर पर है। मैं आमिर खान की तरह ‘परफेक्शनिस्ट’ हूं, इसलिए तैयारियों में जुटी हूं। चौके पर ठुमका किस एंगल से लगना चाहिए और छक्के पर कमर कितनी बार और कितनी लचकनी चाहिए, इसकी प्रैक्टिस कर रही हूं। चौके-छक्के पर एक ही स्टाइल का डांस देख स्पांसर भन्ना जाते हैं, इसलिए वैरायटी पर जोर है। आखिर, पब्लिक हो या स्पांसर सभी को इन दिनों ‘एक्स्ट्रा’ चाहिए न !

अपने जॉब के बारे में इसलिए बता रही हूं ताकि आप समझ सकें कि दो जून की रोटी हमें भी बड़ी मुश्किल से नसीब होती है। लेकिन, आपने बजट में हमें क्या दिया ? लाखों करोड़ों रुपए इधर-उधर बांट दिए, लेकिन आपको एक पल के लिए भी हमारा ख्याल नहीं आया? आपको खेतों में काम करने वाले मजूदरों की याद रही, लेकिन खेलों में काम करने वाली मजदूरनियों को आप कैसे भूल गए?


नरेगा के तहत आप मजदूरों को साल में 100 दिन रोजगार देने के अपने वादे पर कायम हैं,लेकिन हमें तो सिर्फ साल में 40-45 दिन रोजगार मिलता है। उस पर भी पिछले साल तो गृह मंत्री चिदंबरम की जिद के चलते आईपीएल को दक्षिण अफ्रीका ट्रांसफर कर दिया गया और हमारा टिकट कट गया था। आखिर, साल में आईपीएल सिर्फ एक बार होता है तो हमें रोजगार सिर्फ 40-45 दिन मिल पाता है। बाकी इस देश में दूसरा कोई खेल न ठीक से खेला जाता है, न देखा जाता है, जहां हमें रोजगार मिले।

आपके राज में दाल-चावल से लेकर खूबसूरत दिखने वाली क्रीम तक सब आइटम जिस तरह महंगे हो लिए हैं, उसमें ‘पटाखा’ दिखने की आयोजकों की डिमांड पूरी करना मुश्किल हो गया है। मारु दिखने के लिए रोज चार टाइम चेहरे पर मलाई लगानी पड़ती है, जूस पीना पड़ता है और ब्यूटीपार्लर में रेगुलर अडेंनडेंस लगानी पड़ती है। लेकिन, छप्पर फाड़ती दूध-जूस की कीमतों के चलते तो यह आइटम अब वीकली भी नसीब नहीं हो रहे। उस पर ब्यूटीपार्लर वाली आपके सर्विस टैक्स से परेशान है।

बुरा न मानिएगा पर जानती हूं कि महंगाई कम करना आपकी हैसियत से बाहर है। इसलिए कम से कम बजट में संशोधन कर हमें कुछ रकम दें । राज की बात बताती हूं-राहुल बाबा को हमारे लटके-झटके बहुत पसंद हैं। वो आईपीएल में मैच देखने थोड़े आते हैं ! मेरी मांग पर ध्यान दीजिएगा। खैर, चलूं अभी अभी डिमांड आई है कि आईपीएल चीयरलीडर्स के लिए ‘बैकवर्ड मसाला ठुमका’ लगाना प्राइमरी कंडीशन है। कभी सुना है इस ठुमके के बारे में? नहीं न ! इस बार देखिएगा...।

6 comments:

  1. अच्छा, चुटीला व्यंग्य। शुभकामनाएँ।

    प्रमोद ताम्बट
    भोपाल
    www.vyangya.blog.co.in
    www.vyangaylok.blogspot.com

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  2. बेहतरीन ,शानदार!

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  3. शानदार व्यंग्य! बहुत बढ़िया.

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  4. हौसलाफजाई के लिए प्रमोद जी, समीर जी, अनूप जी, कुश जी और भारतीय नागरिक आप सभी का शुक्रिया। इसके अलावा कुलदीप जी ने मेल भेजकर तारीफ की, उनका खास शुक्रिया।
    पीयूष

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